कश्मीर पर पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाने के बाद यूरोपीय संघ का एक और भारत विरोधी कदम, निशाने पर रूस संग दोस्ती
Updated on
10-06-2026 02:52 PM
ब्रसेल्स: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर बयानबाजी के बाद यूरोपीय संघ ने एक और भारत विरोधी कदम उठाया है। मंगलवार को यूरोपीय संघ ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर प्रतिबंधों का 21वां पैकेज प्रस्तावित किया है। इसमें भारत और चीन समेत कई देशों की उन कंपनियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा नेटवर्क और सैन्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को निशाना बनाया गया है जिन पर रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र का समर्थन करने का आरोप है। भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव थोड़ा हैरान करने वाला है क्योंकि इसी साल दोनों के बीच व्यापार समझौता हुआ था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट के जरिए यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने इसकी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस नए पैकेज का मकसद यूक्रेन में रूस की सैन्य गतिविधियों को जारी रखने और उनके लिए फंड जुटाने की क्षमता को और कमजोर करना है। कल्लास ने कहा 'हम एक-एक ईंट करके रूस की युद्ध-अर्थव्यवस्था की नींव को ढहा रहे हैं।' कल्लास वही नेता हैं जिन्होंने इस्लामाबाद में पाकिस्तान में कश्मीर पर विवादित बयान देते हुए पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाए थे।
भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी
यूरोपीय संघ ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ अपने 21वें प्रतिबंध पैकेज का जो प्रस्ताव रखा है उसमें भारत और चीन सहित कई देशों की करीब 50 कंपनियों पर कड़े निर्यात प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। काजा कल्लास ने कहा ने कहा 'प्रस्तावित पैकेज में रूसी तेल की कीमत पर प्राइस कैप को अस्थायी रूप से रोकना, उन संस्थानों पर प्रतिबंध लगाना जिनका इस्तेमाल मॉस्को कथित तौर पर राजस्व जुटाने और मौजूदा प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है और बैंकों, हथियार निर्माताओं, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टोकरेंसी ऑपरेटरों को निशाना बनाने वाले अतिरिक्त उपाय शामिल हैं।'
कल्लास ने कहा 'हम उन व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ अपने प्रतिबंधों के प्रयासों को तेज कर रहे हैं जो यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध में मदद करते हैं।' यूरोपीय संघ की शीर्ष अधिकारी के मुताबिक इस पैकेज में 170 से ज्यादा प्रस्तावित लिस्टिंग शामिल हैं जो दो साल से ज्यादा समय में उनके कार्यालय द्वारा प्रस्तावित प्रतिबंधों का सबसे बड़ा विस्तार है। ये उपाय रूस के वित्तीय क्षेत्र, ऊर्जा उद्योग और ड्रोन बनाने की क्षमताओं पर केंद्रित हैं। ईयू की विदेश मामलों की प्रमुख काजा कल्लास के मुताबिक इन प्रतिबंधों का मकसद ईंट-दर-ईंट रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को ध्वस्त करना है ताकि वह यूक्रेन में अपने सैन्य अभियानों के लिए फंड न जुटा सके।
भारतीय कंपनियों पर लगाया रूस की मदद का आरोप
यूरोपीय संघ (EU) के 21वें प्रतिबंध पैकेज के प्रस्ताव में भारत सहित 6 देशों की कुल 50 कंपनियों पर नए निर्यात नियंत्रण लगाने की बात कही गई है। ई इन 50 कंपनियों की सूची में भारत, चीन, तुर्की, यूएई, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान की फर्में शामिल हैं। लेकिन इनमें कितनी भारतीय कंपनियां शामिल हैं इसकी जानकारी नहीं दी गई है। यह सूची फिलहाल अभी एक प्रस्ताव है जिसे ईयू के सभी सदस्य देशों की मंजूरी मिलना बाकी है। यह पहली बार नहीं है जब भारतीय कंपनियों को निशाना बनाया गया है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में जारी ईयू के 19वें प्रतिबंध पैकेज में 3 भारतीय कंपनियों पर सीधे प्रतिबंध लगाए गए थे।
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