क्या है मामला?
वकील कात्यायनी अग्रवाल के जरिए याचिककर्ता सुरेश तुलसीराम पाटिलखेड़े ने आरोप लगाया कि शेयर ट्रांसफर 18 जनवरी 1989 को हुआ था, जो नवल टाटा के ट्रस्टी पद से इस्तीफा देने के एक हफ्ते बाद हुआ। शिकायत में कहा गया है कि यह ट्रांसफर पब्लिक ट्रस्ट से जुड़े नियमों के मुताबिक नहीं था।टाटा ट्रस्ट ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि ये आरोप एक दुर्भावनापूर्ण और सुनियोजित अभियान का हिस्सा हैं। इसका मकसद उस संस्था को बदनाम करना है जो 130 से ज्यादा साल से देश में चैरिटी गतिविधियों में लगी हुई है।
