क्या होगा फायदा?
एक अन्य सूत्र ने कहा कि जियो कॉन्स्टेलेशन के ऑर्बिटल पैरामीटर, कॉन्फिगरेशन और आर्किटेक्चर भविष्य में किसी अन्य भारतीय कॉन्स्टेलेशन के साथ मिलकर काम करने की सुविधा देते हैं। प्रस्ताव के अनुसार जियो ब्रॉडबैंड, सेल्युलर बैकहॉल जैसी फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विसेज के साथ-साथ डायरेक्ट-टू-डिवाइस जैसी मोबाइल सैटेलाइट सर्विसेज देने की योजना बना रहा है। कंपनी 20-22 ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रही है।सरकार को दिए गए सुझाव में स्पेस रेगुलेटर ने जियो के प्रस्ताव के फायदे गिनाए हैं। इनमें रणनीतिक रक्षा जरूरतों को पूरा करना और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करना शामिल है। रेगुलेटर का मानना है कि कंपनी को रेगुलेटरी और दूसरी पॉलिसी से जुड़ी मदद दी जानी चाहिए, ताकि भारत को अपना पहला घरेलू, नॉन-जियोस्टेशनरी सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन मिल सके।
