मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु ही नहीं छोटे शहरों में भी जमीन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, इस रिपोर्ट को पढ़ लीजिए
Updated on
11-03-2026 01:41 PM
नई दिल्ली: पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में खूब ग्रोथ हो रहा है। इन छोटे शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार की तरफ से लगातार निवेश हो रहा है। फलस्वरूप इन शहरों में आने वाले 2 से 4 साल में जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। यह अनुमान प्रॉपटेक कंपनी स्क्वायर यार्ड्स (Square Yards) की ताज़ा रिपोर्ट में लगाया गया है।
कुछ खास कोरिडोर में 100% बढ़ेगी कीमत
इंडियाज नेक्स्ट रियल एस्टेट ग्रोथ साइकिल: द राइज ऑफ टियर-2 एंड टियर-3 सिटीज (India’s Next Real Estate Growth Cycle: The Rise of Tier-2 and Tier-3 Cities) शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कई बातों का खुलासा किया गया है। इसके मुताबिक सरकार की बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित विकासोन्मुख नीतियों के चलते तय समय सीमा में कुछ खास कॉरिडोर में जमीन की कीमतें 25% से 100% तक बढ़ सकती हैं।
क्यों बढ़ेंगी कीमतें?
इस रिपोर्ट का कहना है कि जब किसी इलाके में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (Logistic Network) मजबूत होता है और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित होते हैं, तो वहां जमीन की कीमतें तैयार हाउसिंग बाजार (Housing Market) के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं। मतलब कि तेज विकास का असर सबसे पहले और सबसे ज्यादा जमीन की कीमतों पर ही दिखाई देता है।
किस जमीन की कीमत तेजी से बढ़ती है?
स्क्वायर यार्ड्स की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि तेजर से विकसित हो रहे इन शहरों में जमीन की कीमतों को बढ़ाने में कई तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर कारक अहम भूमिका निभा सकते हैं:
जिन प्रॉपर्टीज़ की दूरी मेट्रो कॉरिडोर से 500 मीटर से 1 किलोमीटर के बीच होती है, वहां आमतौर पर 8 से 25% तक प्रीमियम देखा जाता है। मेट्रो प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद पूरे कॉरिडोर में कीमतें करीब 15% से 40% तक बढ़ सकती हैं।
एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का असर और भी तेज होता है। इनके प्रभाव वाले इलाकों में प्रोजेक्ट की घोषणा से लेकर पूरा होने तक जमीन की कीमतें 30% से 70% तक बढ़ सकती हैं।
तेजी से विकसित हो रहे शहरों के बाहरी इलाकों, खासकर प्लॉटेड डेवलपमेंट और जमीन के बाजार में, बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के बाद कई वर्षों में कीमतें 80% से 100% से ज्यादा तक बढ़ने की संभावना रहती है।
वहीं औद्योगिक कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स हब, जहां रोजगार के मौके बढ़ते हैं, वहां जमीन की कीमतों में आमतौर पर 20% से 60% तक बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
जहां आर्थिक गतिविधियां वहां बढ़ोतरी
स्क्वायर यार्ड्स के सीईओ और को-फाउंडर तनुज शोरी का कहना है “भारत का रियल एस्टेट बाजार अब एक नए चरण में पहुंच रहा है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी और आर्थिक स्थिरता बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। जैसे-जैसे नए इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री विकसित होंगे, वैसे-वैसे वहां रोजगार बढ़ेगा और इसके साथ ही मकान खरीदने वालों की तरफ से मांग भी बढ़ेगी। इससे लोगों के लिए मकान का मालिक बनने के नए मौके खुलेंगे और उभरते शहरों में संतुलित व टिकाऊ शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा। कमर्शियल रियल एस्टेट का विकास भी इस पूरे माहौल को मजबूत करेगा।”
ये शहर बनेंगे अगले ग्रोथ इंजन
रिपोर्ट के मुताबिक, बजट 2026-27 में घोषित बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से देश की आर्थिक गतिविधियां अब पारंपरिक महानगरों से आगे बढ़कर नए शहरों तक फैलने लगेंगी। इसी वजह से भुवनेश्वर, कटक, इरोड, पुरी, वाराणसी और विशाखापत्तनम जैसे शहर आने वाले समय में रियल एस्टेट के अगले ग्रोथ साइकल की अगुवाई कर सकते हैं। इससे इन शहरों में नए हाउसिंग कॉरिडोर विकसित होने और मकानों की मांग बढ़ने की संभावना है।
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