ईरान से शांति वार्ता के लिए ट्रंप खुद जा सकते हैं पाकिस्तान, खत्म हो रहा युद्धविराम, बम बरसाने की दी है धमकी
Updated on
21-04-2026 02:14 PM
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ शांति वार्ता पर आखिरी बातचीत के लिए खुद पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे राउंड की युद्धविराम वार्ता होने की उम्मीद अब काफी बढ़ गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चर्चा में शामिल एक पाकिस्तानी सूत्र के हवाल से कहा है कि बातचीत के फिर से शुरू करने की दिशा में प्रगति हो रही है। उन्होंने ये भी संकेत दिया है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता हो जाता है तो या तो खुद डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान आ सकते हैं या फिर ऑनलाइन माध्यम से इसमें शामिल हो सकते हैं।
रॉयटर्स ने नाम नहीं बताने की शर्त पर सूत्रों के हवाले से कहा है कि 'चीजें आगे बढ़ रही हैं और कल के लिए बातचीत सही रास्ते पर है।' यूनाइटेड स्टेट्स ने भरोसा जताया है कि सीजफायर का समय खत्म होने के करीब होने के बावजूद दुश्मनी खत्म करने के मकसद से बातचीत आगे बढ़ सकती है। हालांकि ट्रंप ने युद्धविराम खत्म होने के बाद फिर से बमबारी शुरू करने की धमकी दी है।
क्या ईरानी प्रतिनिधिमंडल आएगा पाकिस्तान
ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद आने पर सस्पेंस बना हुआ है। एक सीनियर ईरानी अधिकारी के हवाले से रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि तेहरान बातचीत में हिस्सा लेने के बारे में 'सकारात्मक रिव्यू' कर रहा है भले ही उसने पहले इस प्रक्रिया में शामिल होने से मना कर दिया था। हालांकि ईरानी अधिकारी ने जोर देकर कहा है कि कोई भी आखिरी फैसला अभी नहीं लिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका एक ऐसे समझौते की तलाश में है जिससे तेल की कीमत में स्थिरता आए और होर्मुज स्ट्रेट फिर से पूरी तरह खुले। इसके अलावा ट्रंप ने कहा है कि किसी भी समझौते में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने के साधन न मिलें।
दूसरी तरफ तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने रणनीतिक नियंत्रण का लाभ उठाकर प्रतिबंधों से राहत पाने और युद्ध की फिर से शुरुआत से बचने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा ईरान यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर कोई रोक न लगे। इस्लामाबाद में पहले राउंड की बातचीत के नाकाम रहने के पीछे ऐसे ही मुद्दे थे जिनपर किसी नतीजे पर दूसरे राउंड की बातचीत में भी पहुंचना अत्यंत मुश्किल है। जो झुकेगा उसे हारा हुआ माना जाएगा। ईरान अपनी घरेलू राजनीति में सरेंडर करता हुआ नहीं दिखना चाहता। इसीलिए अगर होती है तो शांति वार्ता काफी जटिल रहने वाली है और बुधवार शाम तक किसी नतीजे तक पहुंचने की संभावना कम लग रही है हां, ये हो सकता है कि युद्धविराम की मियाद बढ़ाने पर कोई सहमति बन जाए।
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