लाल सागर में भारतीय जहाज किसने डुबोया, भारत क्यों नहीं लेता नाम? चाहे अमेरिका हो या ईरान का हमला
Updated on
05-08-2026 12:03 PM
नई दिल्ली/रियाद: यमन के पास लाल सागर में भारतीय झंडे वाले एक व्यापारिक जहाज को मिसाइल या रॉकेट जैसे किसी प्रोजेक्टाइल से हमला कर डूबो दिया गया। इस जहाज का नाम ''MSV फ़ैज़े नूरे ओलिया' था और ये यमन के करीब वाले समुद्री रास्ते से गुजर रहा था। हालांकि अच्छी बात ये थी इस जहाज पर सवाल सभी 13 भारतीय क्रू मेंबर्स और एक विदेशी नागरिक को यमनी कोस्ट गार्ड ने सुरक्षित बचा लिया और मोखा बंदरगाह पहुंचाया।
जहाज पर हमला होने और डूबने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में हमले की निंदा की गई और इसे बिना उकसावे वाली, बिना सुरक्षा वाले नागरिक जहाज पर किया गया हमला बताया गया। नई दिल्ली ने इस इलाके में व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों पर भी चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित और बिना रुकावट के आवाजाही बहाल करने की अपनी मांग दोहराई।
काला सागर, लाल सागर, होर्मुज में भारतीय जहाजों पर होते हमले
भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान में एक खास बात ये है कि किसी भी हमलावर का नाम नहीं लिया गया। इसीलिए सवाल ये है कि ये हमला आखिर किसने किया? सिर्फ लाल सागर ही नहीं बल्कि होर्मुज स्ट्रेट में भी कभी ईरान हमला करता तो कभी अमेरिका तो कभी काला सागर में जहाजों पर कभी यूक्रेन हमला करता है तो कभी रूस। इन हमलों में कई भारतीय नाविकों की मौत हुई है। हालांकि भारत ने हमलों के बाद उन देशों के दूतावास के अधिकारियों को समन भेजकर बुलाया और घटना को लेकर कड़ी आपत्ति भी जताई।लेकिन सवाल ये है कि किसी भी देश की या किसी भी संगठन की इतनी हिम्मत कैसे हो रही है कि वो हमले कर रहा है? यमन में हमला करने के आरोप हूती विद्रोहियों पर लगे हैं। भारत सरकार ने हमलावर का नाम नहीं लिया सिर्फ निंदा की और यमनी अधिकारियों का धन्यवाद किया गया है।
भारत ने क्यों नहीं लिया हमलावर का नाम?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका और ब्रिटेन लाल सागर में हूतियों पर सीधे एयरस्ट्राइक कर रहे हैं। भारत ने अब तक अपनी नौसेना को व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा में तो लगाया है लेकिन वह पश्चिमी देशों के किसी एंटी-हूती मिलिट्री अलायंस का हिस्सा आधिकारिक तौर पर नहीं बना है। नाम न लेकर भारत ने खुद को पश्चिम और मिडिल ईस्ट की इस जंग में निष्पक्ष रखा है।
इसके अलावा हूती विद्रोहियों को ईरान का सीधा समर्थन हासिल है। भारत और ईरान के बीच चाबहार पोर्ट और मध्य एशिया व्यापार को लेकर बेहद महत्वपूर्ण रिश्ते हैं। हूतियों पर सीधा हमलावर रुख अपनाने का असर दिल्ली-तेहरान के कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ सकता है जिसे भारत फिलहाल बचाना चाहता है। भारत के सामने पहले से ही होर्मुज संकट है इसीलिए हो सकता है कि भारत का किसी का नाम नहीं लेने का फैसला रणनीतिक हो सकता है।
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