पुणे पोर्श केस में ताजा अपडेट
- जनता के भारी विरोध के बाद पुलिस ने नाबालिग की जमानत का विरोध किया। JJB ने अपने आदेश में बदलाव किया और उस नाबालिग को एक जुवेनाइल ऑब्जर्वेशन होम में भेज दिया।
- कथित तौर पर ससून जनरल हॉस्पिटल में उस नाबालिग के खून के सैंपल उसकी मां के सैंपल से बदल दिए गए थे, ताकि यह बात छिपाई जा सके कि उसने शराब पी रखी थी।
- पुलिस ने नाबालिग आरोपी के पिता (विशाल अग्रवाल), उसकी मां और उसके दादा को साजिश रचने और अपने परिवार के ड्राइवर पर दोष अपने ऊपर लेने का दबाव डालने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्ता किया।
- दो डॉक्टरों और अस्पताल के एक कर्मचारी को भी कथित तौर पर रिश्वत लेने और फॉरेंसिक सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्ता किया गया। दो बार मालिकों और कर्मचारियों पर भी नाबालिग को शराब परोसने के आरोप में केस दर्ज किया गया।
- सबूतों से छेड़छाड़ और अन्य आरोपों के सिलसिले में हिरासत में लगभग 22 महीने बिताने के बाद, नाबालिग के पिता को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। कोर्ट ने जेल में बिताए गए लंबे समय का हवाला दिया और इसमें शामिल 'पालन-पोषण की विफलता' की कड़ी आलोचना की।
- अग्रवाल परिवार का अपने पिता के जेल से रिहा होने का जश्न मनाते हुए एक वीडियो वायरल हो गया। इससे पूरे देश में कानूनी व्यवस्था की कथित खिल्ली उड़ाए जाने और पीड़ितों के परिवारों को अब भी झेलने पड़ रहे दुख को लेकर एक नई बहस छिड़ गई।
- पुणे पोर्श क्रैश मामले में पीड़ितों में से एक के पिता ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरोपी को जमानत दिए जाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने वायरल वीडियो की निंदा की और आरोप लगाया है कि अपराध रोकने में सिस्टम पूरी तरह से नाकाम रहा है।
