- कोरोना काल में जब प्रवासी मजदूर फंसे थे, तो उन्हें उनके घर पहुंचाने में सोनू सूद ने बहुत मदद की थी। तब वह उनके 'मसीहा' बनकर उभरे थे। जिसने भी जहां भी जिस तरह की मदद मांगी, सोनू सूद ने तुरंत हाथ बढ़ाकर मदद की। उन्होंने लोगों को खाने से लेकर दवाइयां, अस्पताल में बिस्तर, ऑक्सीजन और PPE किट्स भी मुहैया करवाई थीं।
- सोनू सूद ने कुछ साल पहले पिता के सम्मान में 'शक्ति अन्नदानम' की शुरुआत की थी, जिसके तहत वह रोजाना 45 हजार लोगों को खाना खिलाते हैं। यह अभी भी जारी है।
- सोनू सूद ने एक 'प्रवासी रोजगार ऐप' भी बनाया था, जिसके तहत कोरोना काल में नौकरी खोने वाले मजूदरों और श्रमिकों को नौकरी दिलवाने में मदद की जा सके।
- साल 2025 में जब पंजाब में बाढ़ आई, तो सोनू सूद तुरंत ही मदद को खड़े हो गए थे। बाढ़ में पंजाब के कई गांव जलमग्न हो गए थे। तब सोनू सूद ने अपने फाउंडेशन के जरिए बाढ़ से प्रभावित इलाकों में दवाइयां, खाना और बाकी सामान बांटा था। उन्होंने कई गांवों में राहत का सामान पहुंचाया था।
