- 3100 टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइलें (TLAMs)— इनमें से 1000 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं यानी कुल स्टॉक का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खत्म। हर साल उत्पादन क्षमता 200 से कम। यानि 1000 का जो स्टॉक खत्म हुआ है उसे भरने में कम से कम 5 वर्ष लग जाएंगे।
- 400 THAAD इंटरसेप्टर- 190–290 का इस्तेमाल किया गया। अभी इनका प्रोडक्शन हर साल लगभग 96 है लेकिन लक्ष्य 400 तक बढ़ाने का है।
- 2,500 पैट्रियट इंटरसेप्टर- 1,060–1,430 फायर किए गए। अभी हर साल लगभग 650 का प्रोडक्शन हो रहा है जिसे अमेरिका को अपने सहयोगियों को बेचना भी पड़ता है।
- SM-3 और SM-6 मिसाइलें- इनका बहुत ज्यादा इस्तेमाल हुआ है। अनुमानित तौर पर करीब 400 में से 250 से ज्यादा SM-3, 190–370 SM-6 इंटरसेप्टर्स। इन्हें युद्ध से पहले के स्तर तक फिर से बनाने में लगभग दो साल लगेंगे।
- JASSM क्रूज मिसाइलें- 4,000 से ज्यादा के स्टॉक में से करीब 1000 का इस्तेमाल ईरान युद्ध में हुआ। हालांकि इस मिसाइल को लेकर चिंता की बात नहीं है क्योंकि इसका प्रोडक्शन पहले से ही काफी तेज रहा है।
- PrSM (प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल)— यह एक नया सिस्टम है जिसकी संख्या युद्ध से पहले 100 से भी कम थी। 40–70 का इस्तेमाल हुआ। प्रोडक्शन बढ़ाया जा रहा है लेकिन अभी भी यह सीमित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले किए गए सैन्य संसाधनों के इस्तेमाल जैसे हूतियों के खिलाफ रेड सी में ऑपरेशन, यूक्रेन और इज़राइल को मदद ने स्थिति को और खराब कर दिया। यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइलें देने से भी अमेरिका के भंडार में कमी आई है। सप्लाई चेन की समस्याओं, जरूरी पार्ट्स और खनिजों की कमी और पहले कम ऑर्डर मिलने की वजह से अमेरिका के लिए हथियारों के स्टॉक को फिर से भरना मुश्किल हो रहा है। CSIS ने चेतावनी दी है कि फ्रेमवर्क एग्रीमेंट और ज़्यादा प्रोडक्शन के लिए ट्रंप के जोर देने के बावजूद 'क्षमता का मतलब असल प्रोडक्शन नहीं होता है।' इसने कहा है कि अमेरिका की क्षमता अब पोलैंड, ताइवान के साथ साथ इंडो पैसिफिक में कमजोर हो गई है।
